मुशफिकुर रहीम ने 100वें टेस्ट में शतक जड़कर बनाया इतिहास

रविंद्र सिंह

नव॰ 27 2025

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जब मुशफिकुर रहीम ने 214 गेंदों में 106 रन बनाए, तो सिर्फ एक शतक नहीं, बल्कि एक युग का अंत और एक नए युग की शुरुआत हुई। ये शतक उनके 100वें टेस्ट मैच में आया — बांग्लादेश के लिए पहली बार, दुनिया भर में सिर्फ 11वें खिलाड़ी के रूप में, और उनकी उम्र 38 साल की होते हुए भी। ये मैच था शेर-ए-बंगला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम, ढाका का, और तारीख थी 20 नवंबर, 2025।

100 टेस्ट, एक अनोखा सफर

मुशफिकुर ने 9 मई, 2005 को लॉर्ड्स में अपना पहला टेस्ट खेला था। उस दिन वो 19 साल के लड़के थे। आज, 20 साल बाद, वो उसी मैदान के दूसरे छोर पर खड़े थे — अब एक अनुभवी कप्तान, एक अनुशासित बल्लेबाज, और अब एक इतिहास बनाने वाला खिलाड़ी। उनके 100वें मैच की शुरुआत के लिए बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने एक अनूठा आयोजन किया: दूसरे दिन की शुरुआत से पहले, एक छोटा सा सम्मान समारोह, जहां उन्हें एक विशेष ट्रॉफी और एक एल्बम दिया गया, जिसमें उनके हर टेस्ट का एक तस्वीर थी। ये सिर्फ एक शुभकामना नहीं थी — ये एक संदेश था: "तुम्हारा सफर हमारा सफर है।"

मैच का विस्तृत विवरण: शतक और स्टील

पहले इनिंग्स में बांग्लादेश ने 476 रन बनाए। लितन दास ने 128 बनाए, लेकिन जब बल्लेबाजी रुकी, तो जिम्मेदारी मुशफिकुर के कंधों पर थी। उन्होंने अगले दिन 99* से शुरुआत की — एक रन की दूरी पर। उन्होंने दूसरी गेंद पर लगातार लगे लगातार चार रन लगाए, फिर एक लॉन्ग ऑन शॉट से शतक पूरा किया। भीड़ खड़ी हो गई। कोच बेस्ट बाय बाय कर रहे थे। बोर्ड के अध्यक्ष नज़मुल हसन पापन ने आंखें भर लीं।

आयरलैंड ने अपना पहला इनिंग्स 265 रन पर खत्म किया। ताइजुल इस्लाम ने 4 विकेट लेकर बांग्लादेश के लिए 250 टेस्ट विकेट पूरे किए — ये भी एक ऐतिहासिक क्षण था। दूसरे इनिंग्स में बांग्लादेश ने 297/4 घोषित किया, जिसमें मोमिनुल हक ने 87 रन बनाए। आयरलैंड को 509 का लक्ष्य दिया गया। वो अपना दूसरा इनिंग्स 291 पर खत्म कर गए — जिससे बांग्लादेश को 217 रनों से जीत मिली।

क्यों ये इतना खास है? टेंडुलकर और कोहली ने नहीं किया

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ये बात ध्यान देने लायक है: सचिन तेंदुलकर ने अपने 100वें टेस्ट में सिर्फ 28 रन बनाए। विराट कोहली ने 10। दोनों ने अपने करियर में हजारों रन बनाए, लेकिन 100वें टेस्ट पर शतक नहीं लगाया। इसका मतलब ये नहीं कि वो कमजोर थे — बल्कि ये दर्शाता है कि ये मील का पत्थर कितना दुर्लभ है।

मुशफिकुर अब एक ऐसे ग्रुप के हिस्से हैं जिसमें हैं: कोलिन काउड्री, जेवेद मियांदाद, गॉर्डन ग्रीनिज, स्टीव वॉग और जैक्वेस कैलिस। ये नाम दुनिया भर में एक अलग अंदाज में बोले जाते हैं। अब बांग्लादेश का नाम भी इस लिस्ट में शामिल हो गया।

"मैं अब बस एक दायित्व के साथ खेल रहा हूं"

मैच के बाद इंटरव्यू में मुशफिकुर ने कहा: "मुझे भी यकीन नहीं हो रहा कि बांग्लादेश से कोई 100 टेस्ट खेल चुका है। ये बहुत बड़ी बात है।" वो बार-बार ये शब्द दोहराते रहे: "जिम्मेदारी"। वो अब बस खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक लीडर हैं जो अपने बाद के लिए रास्ता बना रहे हैं। उन्होंने बीसीबी को धन्यवाद दिया — खासकर उनके लिए जिस तरह से शुरुआत की गई, वो उन्हें बहुत खुश कर गई।

अगला चरण: T20 सीरीज और भविष्य

अगला चरण: T20 सीरीज और भविष्य

अब बांग्लादेश और आयरलैंड के बीच 29 नवंबर, 2025 से शुरू होने वाली तीन मैचों की T20 सीरीज है — चट्टग्राम के ज़हूर अहमद चौधरी स्टेडियम में। लेकिन अब तक की सभी चर्चा मुशफिकुर के बारे में ही हो रही है। उनके लिए ये अभी अंत नहीं, बल्कि एक नया आरंभ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मुशफिकुर रहीम बांग्लादेश के पहले 100 टेस्ट खेलने वाले खिलाड़ी हैं?

हां, मुशफिकुर रहीम बांग्लादेश के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने 100 टेस्ट मैच खेले। इससे पहले कोई भी बांग्लादेशी खिलाड़ी इस मील के पत्थर तक नहीं पहुंच पाया था। विश्व स्तर पर वो 84वें खिलाड़ी बने, जब उन्होंने 19 नवंबर, 2025 को इस मैच की शुरुआत की।

100वें टेस्ट में शतक लगाने वाले अन्य खिलाड़ी कौन हैं?

दुनिया भर में सिर्फ 11 बल्लेबाज इस उपलब्धि को हासिल कर चुके हैं। इनमें कोलिन काउड्री, जेवेद मियांदाद, गॉर्डन ग्रीनिज, स्टीव वॉग, एलन बॉर्डर, जैक्वेस कैलिस, हैशिम आमला, ग्राहम गूच और इंजमाम-उल-हक शामिल हैं। मुशफिकुर इस शानदार सूची में शामिल होकर एशिया के तीसरे खिलाड़ी बन गए।

क्या इस उपलब्धि ने बांग्लादेश क्रिकेट पर कोई प्रभाव डाला है?

बिल्कुल। बीसीबी ने इस उपलब्धि को राष्ट्रीय गौरव के रूप में समझा है और इसे युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनाने की योजना बनाई है। अब तक बांग्लादेश के लिए 100 टेस्ट खेलना एक सपना था — अब ये एक लक्ष्य बन गया है। बीसीबी ने इसे अपने नवीनतम युवा विकास कार्यक्रम का आधार बनाने का फैसला किया है।

मुशफिकुर का अगला लक्ष्य क्या है?

मुशफिकुर ने कहा है कि वो अभी भी बांग्लादेश के लिए खेलना चाहते हैं, लेकिन अब उनका लक्ष्य खुद को रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि एक ऐसा खिलाड़ी तैयार करना है जो उनकी जगह ले सके। उन्होंने खास तौर पर युवा बल्लेबाजों को टेस्ट क्रिकेट में धैर्य और अनुशासन के महत्व की ओर इशारा किया है।

क्या ये उपलब्धि बांग्लादेश के लिए वैश्विक पहचान बढ़ाती है?

हां। बांग्लादेश क्रिकेट के लिए ये एक नया अध्याय है। अब ये देश केवल एक टीम नहीं, बल्कि ऐसे खिलाड़ियों का घर है जो दुनिया के सबसे बड़े रिकॉर्ड्स को तोड़ सकते हैं। इस उपलब्धि ने विश्व क्रिकेट के निर्णायकों को यह भी समझाया कि छोटे देश भी बड़े इतिहास बना सकते हैं।

क्या मुशफिकुर रहीम ने अब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है?

नहीं। मुशफिकुर ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वो अभी भी खेलना चाहते हैं। वो टेस्ट क्रिकेट में अपनी भूमिका को बनाए रखना चाहते हैं और अगले तीन वर्षों तक बांग्लादेश की टीम के लिए खेलने की योजना बना रहे हैं। उनका लक्ष्य अपने करियर के अंत तक टीम के लिए योगदान देना है।