इस्लामाबाद में एक आत्मघाती बम हमले के बाद जब सबको लगा कि श्रीलंका क्रिकेट टीम पाकिस्तान छोड़ देगी, तो एक अप्रत्याशित मोड़ आया — टीम ने रहने का फैसला किया। नवंबर 13, 2025 को रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम पर निर्धारित पाकिस्तान बनाम श्रीलंका का दूसरा ओडीआई मैच रद्द हो गया। लेकिन उसी दिन, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने एक नया शेड्यूल जारी किया: मैच अब 27 नवंबर, 2025 को खेला जाएगा। यह फैसला सिर्फ एक तारीख बदलने का नहीं, बल्कि पाकिस्तान के लिए एक ऐतिहासिक प्रमाण था — अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अब वापस आ रहा है।
बम हमले के बाद टीम का बदलता रुख
जब इस्लामाबाद में बम फटा, तो श्रीलंका के खिलाड़ियों के बीच घबराहट फैल गई। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीम अगले दिन ही देश छोड़ने की तैयारी में थी। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी कोई उम्मीद नहीं थी। श्रीलंका क्रिकेट (SLC) ने एक आदेश जारी किया — ‘टीम रुके रहे’। यह आदेश सिर्फ एक अधिकारी के फैसले का नतीजा नहीं था, बल्कि एक गहरी विश्वास की घोषणा थी। श्रीलंका के राजदूत ने पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री और PCB अध्यक्ष मोहसिन नकवी से पहले ही सुरक्षा व्यवस्था के बारे में संतुष्टि जताई थी। लेकिन बम हमले ने सब कुछ बदल दिया।
नया शेड्यूल: तीन टीमों का नया खेल
PCB ने जो शेड्यूल जारी किया, वह सिर्फ एक देरी नहीं, बल्कि एक पूरी टूर्नामेंट संरचना का पुनर्गठन था। अब श्रीलंका और जिम्बाब्वे के बीच मैच 25 नवंबर, 2025 को खेला जाएगा, जिसके बाद ही पाकिस्तान बनाम श्रीलंका का ओडीआई 27 नवंबर को होगा। टूर्नामेंट का फाइनल 29 नवंबर को निर्धारित है। यह तीन टीमों के बीच एक छोटी सी ट्रायल श्रृंखला बन गई है — जिसमें हर टीम को दूसरी दो टीमों से खेलना होगा। इस तरह, टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रही, भले ही एक मैच रद्द हो गया हो।
रावलपिंडी स्टेडियम, जो इस्लामाबाद से सिर्फ 15 किमी दूर है, बम हमले के बाद एक असुरक्षित क्षेत्र बन गया था। लेकिन PCB ने इसे बदलने की बजाय, समय बदल दिया। यह एक जानबूझकर चुनाव था — जिससे संदेश दिया गया कि भय नहीं, निर्णय जीतेगा।
मोहसिन नकवी: एक आदमी, दो भूमिकाएँ
मोहसिन नकवी की भूमिका यहाँ अनोखी है। वह न केवल पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष हैं, बल्कि पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री भी हैं। यह दोहरी भूमिका उन्हें एक अद्वितीय अधिकार देती है — वह न तो सिर्फ खेल के नियम बना सकते हैं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी जिम्मेदार हैं। उन्होंने श्रीलंका के राजदूत के साथ बैठक की, उन्होंने खिलाड़ियों को सुरक्षित महसूस कराया, और फिर बम हमले के बाद भी शेड्यूल बदलकर टूर्नामेंट को बचाया। उनके बिना, श्रीलंका की टीम शायद वापस नहीं रुकती।
पाकिस्तान के लिए एक नया अध्याय
2009 के बाद से पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट लगभग बंद रहा। लाहौर में श्रीलंका टीम पर हमले के बाद, दुनिया की टीमें पाकिस्तान के लिए बहुत देर तक नहीं आईं। इस बार, श्रीलंका का फैसला एक नया मोड़ है। यह नहीं कह रहा कि सुरक्षा पूरी तरह से बेहतर हो गई है — बल्कि यह कह रहा है कि अब खेल का महत्व सुरक्षा के डर से बड़ा है।
जिम्बाब्वे के आने से भी एक संदेश मिलता है — अफ्रीकी टीमें भी पाकिस्तान के लिए तैयार हैं। यह एक छोटा टूर्नामेंट है, लेकिन इसका प्रभाव बड़ा है। अगर यह सफल होता है, तो ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत — सभी टीमें वापस आएंगी।
क्या अगला कदम?
अब PCB को फाइनल मैच के लिए रावलपिंडी या लाहौर का इस्तेमाल करना होगा। इस्लामाबाद के आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा अभी भी जांच में है। अगले दो हफ्ते में, टीमों को अपनी सुरक्षा योजनाएँ फिर से देखनी होंगी। लेकिन एक बात पक्की है — खिलाड़ी अब डर के बजाय खेलने के लिए आ रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रीलंका टीम ने इस्लामाबाद बम हमले के बाद पाकिस्तान छोड़ने का फैसला क्यों नहीं किया?
श्रीलंका क्रिकेट ने टीम को रुकने का आदेश दिया क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को विश्वसनीय पाया। राजदूत और PCB के बीच हुई बैठकों के बाद, उन्हें लगा कि टूर्नामेंट को बचाना संभव है। इसके अलावा, खिलाड़ियों के लिए खेलना एक पेशा है — और उन्होंने अपने करियर के लिए जोखिम लेने का फैसला किया।
पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी का क्या महत्व है?
2009 के बाद से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय टीमों के लिए एक असुरक्षित गंतव्य बन गया था। श्रीलंका का फैसला इस भावना को बदलने का पहला कदम है। अगर यह टूर्नामेंट सफल होता है, तो ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और भारत जैसी बड़ी टीमें भी पाकिस्तान आने के लिए तैयार होंगी — जिससे पाकिस्तानी क्रिकेट को वित्तीय और भावनात्मक दोनों तरह से लाभ होगा।
मोहसिन नकवी की दोहरी भूमिका कैसे इस निर्णय में मदद करती है?
जब कोई व्यक्ति खेल और सुरक्षा दोनों के लिए जिम्मेदार होता है, तो निर्णय तेज़ और समन्वित होते हैं। मोहसिन नकवी ने सीधे सुरक्षा बलों को निर्देश दिए, जिससे श्रीलंका टीम को तुरंत सुरक्षा गारंटी मिली। यह अनुकूलन एक अन्य देश में असंभव होता।
जिम्बाब्वे का आना क्यों महत्वपूर्ण है?
जिम्बाब्वे एक ऐसी टीम है जो पाकिस्तान के लिए आने के लिए आर्थिक और राजनीतिक रूप से कम वजन रखती है। उनका आना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दरवाजा अब सिर्फ बड़ी टीमों के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए खुल रहा है। यह एक व्यापक विश्वास का संकेत है।
27 नवंबर का मैच क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
यह मैच बम हमले के 14 दिन बाद हो रहा है — जिससे यह साफ हो जाता है कि भय को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस मैच का परिणाम नहीं, बल्कि इसका आयोजन ही पाकिस्तान की सुरक्षा क्षमता का टेस्ट है। अगर लाखों दर्शक इसे देखने आते हैं, तो यह दुनिया को यह बताएगा कि पाकिस्तान खेल के लिए सुरक्षित है।
इस टूर्नामेंट के बाद क्या अपेक्षित है?
अगर यह टूर्नामेंट सफल होता है, तो अगले साल भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें पाकिस्तान की यात्रा करने की संभावना है। PCB ने पहले ही 2026 के लिए एक बड़ा टूर्नामेंट तैयार कर रखा है। इस बार का सफलता का अनुभव उन्हें इस योजना को आगे बढ़ाने की शक्ति देगा।