ब्राह्मण विद्वत परिषद ने दीपावली 2025 को 20 अक्टूबर तय किया

रविंद्र सिंह

अक्तू॰ 19 2025

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जब पंडित शोभित शास्त्री, अध्यक्ष of ब्राह्मण विद्वत परिषद ने बुधवार को चौहट्टेश्वर महादेव मंदिर, मोहल्ला कोट‑पूर्वी (संभल) के प्रांगण में एक बड़े शास्त्रीय सभा का आयोजन किया, तो यह स्पष्ट हो गया कि इस साल दीपावली 2025संभल की तिथि 20 अक्टूबर, सोमवार तय की गई है। यह निर्णय सभी उपस्थित पंडितों, शिक्षाविदों व समाजसेवकों के सर्वसम्मति से लिया गया, जिससे अगले कुछ दिनों में देश‑भर में टकराव को रोकने की उम्मीद है।

बैठक की पृष्ठभूमि और प्रमुख बिंदु

बैठक में दीपावली से जुड़ी पंचांग प्रविधियों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। पंडित शोभित शास्त्री ने कहा, "इस वर्ष दीपावली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी, जबकि धन त्रयोदशी 18 अक्टूबर, नर्क चतुर्दशी 19 अक्टूबर, गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर और भैया दोज 23 अक्टूबर को आयोजित होंगे।" इस क्रम‑बद्ध तिथियों में उन्होंने शुभ मुहूर्त एवं शुभ लग्न की पुष्टि भी की।

बैठक में उपस्थित पंडित अजय शुक्ला, पंडित कैलाशचन्द्र शर्मा, पंडित शशिभूषण शास्त्री, विष्णुदत्त त्रिपाठी और कई अन्य विद्वानों ने इस निर्णय को समर्थन दिया। कई शॉर्ट नोट्स में उल्लेख है कि इस तिथि निर्धारण में सूर्य सिद्धान्त, चन्द्र सिद्धान्त और नक्षत्रों की स्थिति को गहराई से जांचा गया।

धमतरी में विप्र विद्वत परिषद की अलग तिथि

इसी सप्ताह की गुरुवार को धमतरी में विप्र विद्वत परिषद ने अपना विशेष सत्र बुलाई। यहाँ पंडित अशोक शास्त्री, पंडित होमन प्रसाद शास्त्री और पंडित महेश शास्त्री ने बताया कि उनका मानना है कि दीपावली 21 अक्टूबर को मनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "प्रदोष व्यापिनी कार्तिक आमावस्या को महालक्ष्मी पूजन किया जाएगा, और अगर अगले दिन उदय व्यापिनी के 24 मिनट के लिए अमावस्या विद्यमान रहे तो दीपावली का पर्व शास्त्र समत है।" इस वक्तव्य में उन्होंने धर्मसिंधु ग्रंथ का हवाला देते हुए बताया कि वह प्राचीन ग्रन्थ विभिन्न पंचांगों के तुलनात्मक अध्ययन पर बल देता है।

काशी विद्वत परिषद की राष्ट्रीय बैठक

काशी विद्वत परिषद की राष्ट्रीय बैठक

काशी में आयोजित राष्ट्रीय बैठक में पंडित रामनारायण द्विवेदी, महामंत्री ने कहा, "हमारे सनातन धर्म में दीपावली का पर्व निशिथ काल में मनाया जाता है, इसलिए उदया तिथि को महत्व नहीं दिया जाता। सूर्य सिद्धान्त पंचांग के अनुसार 20 अक्टूबर को दीपावली मनाने का निर्णय लिया गया है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ पंचांगकारों द्वारा लिखी 21 अक्टूबर की तिथि से भ्रम उत्पन्न हुआ था, लेकिन यह विवादात्मक नहीं है क्योंकि दोनो तिथियाँ धार्मिक सिद्धान्तों के अनुसार वैध हो सकती हैं।

अन्य परिषदों की सामूहिक मंशा

रामपुर में जिला ब्राह्मण सभा विद्वत परिषद ने भी समान निर्णय लिया, जिससे पूरे सनातन जगत में एकरूपता बनाए रखने की कोशिश की गई। ललितपुर में वैदिक विद्वत परिषद के आचार्य पवन तांत्रिक ने 7 सितम्बर 2025 को होने वाले पितृ आह्वान पूर्णिमा श्राद्ध और चंद्रग्रहण पर चर्चा की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि धार्मिक कैलेंडर का नियोजन केवल दीपावली तक सीमित नहीं है।

औराँज के ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र परिषद ने 11 माह पूर्व एक व्यापक समिति का गठन किया था, जिसके अध्यक्ष थे पंडित पुरूषोत्तम शर्मा। उन्होंने बताया कि विभिन्न संस्थाओं द्वारा अलग‑अलग तिथियों को घोषित करने से पैदा हुआ भ्रम अब समाप्त होगा, क्योंकि सभी परिषदें अब एक-दूसरे के निर्णयों को सुनकर सामंजस्य स्थापित कर रही हैं।

भविष्य की संभावनाएँ और जनता की अपेक्षा

भविष्य की संभावनाएँ और जनता की अपेक्षा

यहाँ तक कि स्थानीय व्यापारी संघों ने भी बताया कि समस्त तिथियों में एकरूपता से पानी‑विकास, रौशनी और सांस्कृतिक समारोहों की योजना बनाना आसान होगा। जबकि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी स्थानीय पंचांगकारों की राय पर भरोसा किया जा रहा है, लेकिन बड़े शहरों में मीडिया ने पहले ही इस निर्णय को व्यापक रूप से प्रसारित किया है।

नज़र रखी जाए तो अगले महीने के भीतर ये तिथियाँ आधिकारिक कैलेंडर में दर्ज हो जाएँगी, और सरकारी और निजी दोनों स्तर पर दीपावली उत्सव की तैयारी शुरू हो जाएगी। सार्वजनिक मंदिरों में विशेष पूजन, स्कूल‑कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और व्यापारिक क्षेत्र में बिक्री में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

बार‑बार पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपावली 2025 की नई तिथि कौन‑से समूह ने तय की?

ब्राह्मण विद्वत परिषद ने अपने शास्त्रीय समिट में 20 अक्टूबर, 2025 को दीपावली मनाने का सर्वसम्मति निर्णय लिया, जबकि धमतरी की विप्र विद्वत परिषद ने 21 अक्टूबर को समर्थन दिया। दोनों तिथियों पर आज तक चर्चाएँ चल रही हैं।

धमतरी की विप्र विद्वत परिषद ने 21 अक्टूबर क्यों चुना?

उनका मानना है कि प्रदोषकाल में अमावस्या का प्रभाव जारी रहने पर अगले दिन के 24 मिनट के उदय को शास्त्र अनुसार दीपावली मानना उचित है। उन्होंने इस तर्क को धर्मसिंधु ग्रंथ के हवाले से प्रस्तुत किया।

क़ाशी विद्वत परिषद ने अपने निर्णय का आधार क्या बताया?

पंडित रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि सूर्य सिद्धान्त पंचांग के अनुसार दीपावली निशिथ काल में मनाई जाती है, इसलिए 20 अक्टूबर को तिथि ठहराना शास्त्रीय रूप से सही है। उन्होंने उदया तिथि को महत्व न देने की बात भी कहा।

यह तिथि निर्णय स्थानीय व्यापारियों पर कैसे असर डालेगा?

एकरूप तिथि से विक्रेता अपनी इन्वेंट्री और प्रचार-प्रसार की योजना स्पष्ट रूप से बना पाएँगे, जिससे बिक्री में वृद्धि की संभावना है। अब छोटे‑बड़े दोनों बाजारों में समान तिथि के अनुसार मेले और रौशनी सजावट की खरीद‑बिक्री ठीक‑ठाक चल पाएगी।

क्या इस साल के दीपावली के कार्यक्रम में कोई नया रूझान देखा जाएगा?

सभी परिषदों ने पर्यावरण‑पूरक दीयों और डिजिटल अर्टिफ़ैक्ट्स को प्रोत्साहित किया है। कई शहरों में इलेक्ट्रिक लाइटिंग और सामुदायिक वाद्य‑भोज आयोजित होंगे, जिससे पारंपरिक वर्तनी का आधुनिक रूप सामने आएगा।